हिंदी के चिरदानी मुंशी अजमेरी


हिंदी के चिरदानी मुंशी अजमेरी
एक ऐसे मूक साहित्य साधक के समग्र को प्रकाश में लाने का अथक और दीर्घकालिक प्रयास है, जिसे परिणति प्रदान की है पं. सुधाकर शर्मा ने! ओरछा राज्य के सम्मानित राजकवि मुंशी अजमेरी प्रेम के नाम से विख्यात पं. प्रेम विहारी पाचोलिया राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के न केवल काव्य गुरु ही थे,वरन् उनके जीवन के सुख के उद्योगी और दुःख के भोगी भी थे! मैथिलीशरण गुप्त के व्यक्तित्व – कृतित्व के निर्माता,पथदृष्टा,प्रेरक, देश काल का मेल मिलाने वाले समन्वयक मुंशी अजमेरी प्रेम के विषय में तमाम विवाद – अपवाद तो अधिकृत और निकटवर्तियों द्वारा प्रकाश में लाये गये पर उनके भागवत व्यक्तित्व, वैदिक-ज्ञान, आयुर्वेद- ज्ञान, व्याकरण और भाषा पर वृहद हस्तक्षेप,सम्पादन कला, सांस्कृतिक सूझ-समझ, क्रांति नायक महामना राष्ट्रीय चरित्र और काव्यगत संदर्भों में जो प्रकाश आना चाहिये था,वह कृपणता और कूट चक्रों का शिकार हो गया! पं. सुधाकर शर्मा ने इस अनुष्ठानिक महनीय कार्य को पूर्णता प्रदान की है!
